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विस्तृत उत्तर
महालय = पितृ पक्ष का दूसरा प्रसिद्ध नाम।
### परिचय:
हिन्दू पंचांग के अनुसार, वर्ष में एक विशेष अवधि पितरों के लिए पूर्णतः समर्पित की गई है, जिसे 'पितृ पक्ष' या 'महालय' कहा जाता है।
### महालय की अवधि:
यह अवधि भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक सोलह दिनों तक चलती है।
### मुख्य बिंदु:
1नाम
- ▸'पितृ पक्ष' और 'महालय' = एक ही अवधि के दो नाम।
- ▸दोनों समानार्थी हैं।
2अवधि
- ▸कुल 16 दिनों की अवधि।
- ▸भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा → आश्विन कृष्ण अमावस्या तक।
3महालय का प्रथम दिन
- ▸'प्रतिपदा' = महालय पक्ष का प्रथम दिन।
- ▸यह संपूर्ण श्राद्ध कर्मकाण्ड का प्रवेश द्वार है।
4महालय का अंतिम दिन
- ▸'सर्वपितृ अमावस्या' = महालय का अंतिम दिन।
### इस काल में पितरों की उपस्थिति:
- ▸वायु पुराण और अन्य संहिताओं के अनुसार, इस पवित्र काल में पूर्वज चंद्रलोक के माध्यम से दक्षिण दिशा से अपने घर के द्वार पर वायु रूप में उपस्थित होते हैं।
- ▸वे अपने वंशजों से सम्मान, तर्पण और अन्नादि की प्रतीक्षा करते हैं।
### महत्व:
महालय' शब्द ही पवित्रता और गरिमा का प्रतीक है — यह वह महान काल है जब पितृलोक और मृत्युलोक का संयोग होता है।
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