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विस्तृत उत्तर
पितृ पक्ष की अवधि = एक निश्चित और शास्त्र-निर्धारित कालावधि।
### कुल अवधि:
यह अवधि भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक सोलह दिनों तक चलती है।
### स्पष्ट उत्तर:
पितृ पक्ष = 16 दिन (सोलह दिन) का होता है।
### अवधि का विवरण:
प्रारंभ
- ▸भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से।
समापन
- ▸आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या) तक।
कुल दिन
- ▸16 दिन।
### इन 16 दिनों का स्वरूप:
- ▸प्रथम दिन = प्रतिपदा (पितृ पक्ष का प्रवेश द्वार)।
- ▸अंतिम दिन = सर्वपितृ अमावस्या (समापन)।
- ▸बीच में विभिन्न तिथियाँ — हर तिथि का अपना विशिष्ट महत्व।
### इन 16 दिनों में क्या होता है:
- ▸इस पवित्र काल में पूर्वज चंद्रलोक के माध्यम से दक्षिण दिशा से अपने मृत्यु लोक के घर के द्वार पर वायु रूप में उपस्थित होते हैं।
- ▸वे अपने वंशजों से सम्मान, तर्पण और अन्नादि की प्रतीक्षा करते हैं।
### महत्व:
ये 16 दिन = दो लोकों का संयोग काल, जब पितृलोक और मृत्युलोक का सेतु सबसे प्रबल होता है।
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