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लक्ष्मी व्रत📜 व्रत परंपरा, महालक्ष्मी व्रत कथा1 मिनट पठन

महालक्ष्मी व्रत सोलह दिन कैसे रखें?

संक्षिप्त उत्तर

भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से 16 दिन। प्रतिदिन लक्ष्मी पूजा + कथा। 16 सूत डोरा। एक समय भोजन। उद्यापन: ब्राह्मण/सुहागिन भोजन+दान। 16 = पुष्प/सुपारी/श्रृंगार।

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विस्तृत उत्तर

महालक्ष्मी व्रत = भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से 16 दिन:

विधि

  1. 1आरंभ: भाद्रपद शुक्ल अष्टमी (राधाष्टमी)।
  2. 2अवधि: 16 दिन (अष्टमी→अष्टमी)।
  3. 3प्रतिदिन लक्ष्मी पूजा — घी दीपक, कमल, कुमकुम।
  4. 416 सूत का डोरा बांधें (हाथ में)।
  5. 5प्रतिदिन महालक्ष्मी व्रत कथा सुनें/पढ़ें।
  6. 6एक समय भोजन (फलाहार/सात्विक)।
  7. 716वें दिन = उद्यापन: ब्राह्मण/सुहागिन भोजन + दान।
  8. 816 की संख्या: 16 पुष्प, 16 सुपारी, 16 श्रृंगार।

कथा (संक्षेप): एक निर्धन ब्राह्मणी ने 16 दिन व्रत → लक्ष्मी प्रसन्न → धन-सुख। राजा ने अपमान → लक्ष्मी रुष्ट → दरिद्रता → पुनः व्रत → सुख।

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शास्त्रीय स्रोत
व्रत परंपरा, महालक्ष्मी व्रत कथा
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