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पितृ पक्ष⏱ 2 मिनट पठन

पितृ पक्ष में पितर कहाँ से आते हैं?

वायु पुराण के अनुसार पितर चंद्रलोक के माध्यम से दक्षिण दिशा से अपने वंशजों के घर के द्वार पर वायु रूप में उपस्थित होते हैं।

संक्षिप्त उत्तर

वायु पुराण के अनुसार पितर चंद्रलोक के माध्यम से दक्षिण दिशा से अपने वंशजों के घर के द्वार पर वायु रूप में उपस्थित होते हैं। 16 दिनों तक वे सम्मान, तर्पण और अन्नादि की प्रतीक्षा करते हैं।

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विस्तृत उत्तर

पितरों का आगमन = पितृ पक्ष का सबसे रहस्यमय और दिव्य पहलू, जिसका वर्णन वायु पुराण और अन्य संहिताओं में मिलता है।

### पुराणों का कथन:

वायु पुराण और अन्य संहिताओं के अनुसार, इस पवित्र काल में हमारे पूर्वज चंद्रलोक के माध्यम से दक्षिण दिशा से अपने मृत्यु लोक के घर के द्वार पर वायु रूप में उपस्थित होते हैं।

### पितरों के आगमन का मार्ग:

1स्रोत स्थान

  • ▸चंद्रलोक = पितर सामान्यतः चंद्रलोक में निवास करते हैं।
  • ▸पितृ पक्ष में वे चंद्रलोक के माध्यम से आते हैं।

2दिशा

  • ▸दक्षिण दिशा से आते हैं।
  • ▸शास्त्रों में दक्षिण दिशा को यमलोक और पितृलोक की दिशा माना गया है।

3गंतव्य

  • ▸अपने मृत्यु लोक के घर के द्वार पर।
  • ▸अर्थात् वंशजों के घर तक।

4किस रूप में

  • ▸वायु रूप में उपस्थित होते हैं।
  • ▸स्थूल शरीर नहीं — सूक्ष्म वायु रूप।

### पितरों की अपेक्षा:

  • ▸वे अपने वंशजों से सम्मान, तर्पण और अन्नादि की प्रतीक्षा करते हैं।
  • ▸16 दिनों तक वे वंशजों के द्वार पर रहते हैं।

### शास्त्रीय आधार:

वायु पुराण = इस सिद्धांत का प्रमुख स्रोत।

इसके अतिरिक्त अन्य संहिताएँ भी इसी सिद्धांत की पुष्टि करती हैं।

### महत्व:

यह दर्शन सिद्ध करता है कि पितृ पक्ष = पितृलोक और मृत्युलोक के बीच खुले द्वार का काल। पितर स्वयं वंशजों के द्वार आते हैं — वंशजों को केवल उनका स्वागत और तर्पण करना होता है।

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4. किस रूप में

- वायु रूप में उपस्थित होते हैं। - स्थूल शरीर नहीं — सूक्ष्म वायु रूप। ### पितरों की अपेक्षा: - वे अपने वंशजों से सम्मान, तर्पण और अन्नादि की प्रतीक्षा करते हैं। - 16 दिनों तक वे वंशजों के द्वार पर रहते हैं। ### शास्त्रीय आधार: वायु पुराण = इस सिद्धांत का प्रमुख स्रोत।

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