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महत्व

भक्ति का महत्व(2)

भक्ति का अर्थभक्ति क्या है?भक्ति का महत्व
सरल उत्तर

श्वेताश्वतर उपनिषद (6/23) में 'यस्य देवे परा भक्तिः' — ईश्वर और गुरु में परम भक्ति हो तो ही उपनिषद-ज्ञान प्रकट होता है। मुण्डकोपनिषद (3/1/5) में आत्मा उसी के लिए प्रकट होती है जिसे वह चुनती है — यह चुनाव भक्ति और प्रेम पर आधारित है।

स्रोत प्रश्न: उपनिषद में भक्ति का महत्व क्या है? →
शास्त्र ज्ञान

उपनिषद में भक्ति का महत्व क्या है?

श्वेताश्वतर उपनिषद (6/23) में 'यस्य देवे परा भक्तिः' — ईश्वर और गुरु में परम भक्ति हो तो ही उपनिषद-ज्ञान प्रकट होता है। मुण्डकोपनिषद (3/1/5) में आत्मा उसी के लिए प्रकट होती है जिसे वह चुनती है — यह चुनाव भक्ति और प्रेम पर आधारित है।

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गीता दर्शन

गीता में भक्ति का महत्व क्या है?

गीता (11/54) के अनुसार अनन्य भक्ति से ही ईश्वर को तत्त्व से जाना और देखा जा सकता है। अध्याय 12 (भक्तियोग) में श्रद्धापूर्वक उपासना करने वाले को सर्वोत्तम योगी कहा गया है। भक्ति सबसे सुगम और श्रेष्ठ मार्ग है।

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और महत्व
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