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महामृत्युंजय मंत्र

Mahamrityunjaya Mantraभगवान शिव को समर्पित

स्रोत: ऋग्वेद (7.59.12)

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

📖 अर्थ (Meaning)

हम तीन नेत्रों वाले, सुगंधित, पोषण करने वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं। जैसे ककड़ी अपने बंधन से मुक्त होती है, वैसे हमें मृत्यु से मुक्त करें, अमृत से नहीं।

लाभ (Benefits)

रोग निवारण, दीर्घायु, मृत्यु भय से मुक्ति, शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य।

📿 जाप विधि (How to Chant)

शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए या रुद्राक्ष माला पर जाप करें।

🔢 जाप संख्या

महामृत्युंजय मंत्र का जाप 108 बार करना शुभ माना जाता है।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र: महामृत्युंजय मंत्र का अर्थ क्या है?
उ: हम तीन नेत्रों वाले, सुगंधित, पोषण करने वाले भगवान शिव की पूजा करते हैं। जैसे ककड़ी अपने बंधन से मुक्त होती है, वैसे हमें मृत्यु से मुक्त करें, अमृत से नहीं।
प्र: महामृत्युंजय मंत्र के लाभ क्या हैं?
उ: रोग निवारण, दीर्घायु, मृत्यु भय से मुक्ति, शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य।
प्र: महामृत्युंजय मंत्र का जाप कैसे करें?
उ: शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए या रुद्राक्ष माला पर जाप करें।
प्र: महामृत्युंजय मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?
उ: महामृत्युंजय मंत्र का जाप 108 बार करना शुभ माना जाता है।
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