ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
चिच्ली, मध्य प्रदेश

चिच्ली — पंचांग

20 अप्रैल 2027, मंगलवार

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
18:12
चंद्रास्त
05:03
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अप्रैल 2027 — मासिक पंचांग

सर्वार्थ सिद्धि योग
20 अप्रैल 2027, मंगलवार को सर्वार्थ सिद्धि योग है — सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम दिन

पंचांग — पाँच अंग

तिथि
शुक्ल पूर्णिमा
00:00 तक
अगली: कृष्ण प्रतिपदा
प्रगति4%
नक्षत्र
चित्रा (1 पाद)
00:00 तक
अगली: स्वाति
स्वामी: मंगल
योग
हर्षण
17:45 तक
अगला: वज्र
शुभ
करण
विष्टि
00:00 तक
अगला: बव
अशुभ
वार
मंगलवार

पंचांग सार

तिथि
शुक्ल पूर्णिमा· 00:00 तक
कृष्ण प्रतिपदा
नक्षत्र
चित्रा · पद 1· 00:00 तक
स्वाति
योग
हर्षण· 17:45 तक
वज्र
करण
विष्टि· 00:00 तक
बव
वार
मंगलवार
पक्ष
शुक्ल पक्ष

ग्रह स्थिति

सूर्य
राशिमेष
नक्षत्रअश्विनी
पद2
देशांतर5°28'58"
चन्द्रमा
राशिकन्या
नक्षत्रचित्रा
पद1
देशांतर173°59'29"

राशि

चंद्र राशि
कन्या
सूर्य राशि
मेष

चिच्ली — शुभ-अशुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:15 — 05:03
प्रातः सन्ध्या
05:03 — 06:39
सूर्योदय
05:51
अभिजित मुहूर्त
11:50 — 12:38
अमृत कालविशेष
12:14 — 13:50
विजय मुहूर्त
16:04 — 16:55
गोधूलि मुहूर्त
18:13 — 19:01
सूर्यास्त
18:37
सायाह्न सन्ध्या
18:40 — 19:49
निशिता मुहूर्त
23:50 — 00:38
राहु काल
15:25 — 17:01
यमगंड काल
07:26 — 09:02
गुलिक काल
12:14 — 13:50
प्रथम दुर्मुहूर्त
09:50 — 10:38
द्वितीय दुर्मुहूर्त
13:50 — 14:38
चंद्रोदय
18:12
चंद्रास्त
05:03
मध्याह्न
12:14
सर्वार्थ सिद्धि योगसम्पूर्ण दिन

हिन्दू पंचांग — संवत् एवं मास

चन्द्र माह (पूर्णिमान्त)
वैशाख
चन्द्र माह (अमान्त)
वैशाख
पक्ष
शुक्ल पक्ष
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1949
गुजराती संवत्
2082

नक्षत्र विस्तार

नक्षत्र पद
पद 1
चित्रा
नक्षत्र स्वामी
मंगल
नक्षत्र देवता
विश्वकर्मा
सूर्य नक्षत्र
अश्विनी
पद 2स्वामी: केतु

ऋतु एवं अयन

वैदिक ऋतु
वसन्त
द्रिक ऋतु
वसन्त
अयन
उत्तरायण

दिनमान एवं रात्रिमान

दिनमान
12 घण्टे 46 मिनट 27 सेकण्ड
31 घटी 56 पल
रात्रिमान
11 घण्टे 13 मिनट 33 सेकण्ड
28 घटी 4 पल
मध्याह्न (सौर)
12:14
सूर्य का उच्चतम बिन्दु

दिन का चौघड़िया — 20 अप्रैल 2027, मंगलवार

अमृतशुभलाभचरकालउद्वेगरोग
05:5107:26
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
07:2609:02
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
09:0210:38
चर
यात्रा, वाहन चालन
10:3812:14
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
12:1413:50
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
13:5015:25
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
15:2517:01
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
17:0118:37
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें

रात का चौघड़िया

18:3720:01
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
20:0121:25
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
21:2522:50
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
22:5000:14
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
00:1401:38
चर
यात्रा, वाहन चालन
01:3803:02
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
03:0204:26
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
04:2605:51
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें

चिच्ली पंचांग — अप्रैल 2027

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अन्य शहरों का पंचांग — 20 अप्रैल 2027, मंगलवार

दिल्लीमुंबईकोलकाताचेन्नईबेंगलुरुहैदराबादअहमदाबादपुणेजयपुरलखनऊवाराणसीप्रयागराज

चिच्ली पंचांग — 20 अप्रैल 2027, मंगलवार

चिच्ली (मध्य प्रदेश) के लिए 20 अप्रैल 2027, मंगलवार का सम्पूर्ण हिन्दू पंचांग यहाँ प्रस्तुत है। पंचांग के पाँच अंग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — के साथ-साथ सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल, यमगंड काल, गुलिक काल, ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और चौघड़िया की सटीक जानकारी दी गई है।

यह पंचांग चिच्ली के अक्षांश-देशांतर के अनुसार खगोलीय गणना पर आधारित है, जिससे सूर्योदय और अन्य समय स्थानीय रूप से सटीक हैं। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, व्रत या मुहूर्त के लिए अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिच्ली में 20 अप्रैल 2027, मंगलवार को सूर्योदय कब है?

चिच्ली में 20 अप्रैल 2027, मंगलवार को सूर्योदय 05:51 बजे और सूर्यास्त 18:37 बजे है। ये समय खगोलीय गणना के आधार पर सटीक हैं।

चिच्ली में 20 अप्रैल 2027, मंगलवार को राहु काल कब है?

चिच्ली में 20 अप्रैल 2027, मंगलवार को राहु काल 15:25 से 17:01 तक है। इस समय नए कार्य प्रारंभ न करें।

चिच्ली में 20 अप्रैल 2027, मंगलवार को तिथि क्या है?

चिच्ली में 20 अप्रैल 2027, मंगलवार को शुक्ल पूर्णिमा तिथि है।

पंचांग के पाँच अंग कौन से हैं?

पंचांग के पाँच अंग हैं — तिथि (चंद्र दिन), नक्षत्र (चंद्र मंडल), योग (सूर्य-चंद्र संयोग), करण (अर्ध-तिथि) और वार (सप्ताह का दिन)। ये पाँचों मिलकर किसी भी दिन की शुभता निर्धारित करते हैं।

अभिजित मुहूर्त किसे कहते हैं?

अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय है, जो सौर मध्याह्न (solar noon) के आसपास 48 मिनट का होता है। बृहत्संहिता के अनुसार यह दिन का आठवाँ मुहूर्त है।