ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
चिच्ली, मध्य प्रदेश

चिच्ली — पंचांग

15 सितंबर 2027, बुधवार

सूर्योदय
06:01
सूर्यास्त
18:19
चंद्रोदय
17:51
चंद्रास्त
05:17
← पिछला दिनआज का पंचांगअगला दिन →

सितंबर 2027 — मासिक पंचांग

पंचक चल रहा है
पंचक काल में शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं

पंचांग — पाँच अंग

तिथि
शुक्ल पूर्णिमा
00:00 तक
अगली: कृष्ण प्रतिपदा
प्रगति12%
नक्षत्र
शतभिषा (4 पाद)
11:32 तक
अगली: पूर्वभाद्रपद
स्वामी: राहु
योग
धृति
09:11 तक
अगला: शूल
शुभ
करण
विष्टि
00:00 तक
अगला: बव
अशुभ
वार
बुधवार

पंचांग सार

तिथि
शुक्ल पूर्णिमा· 00:00 तक
कृष्ण प्रतिपदा
नक्षत्र
शतभिषा · पद 4· 11:32 तक
पूर्वभाद्रपद
योग
धृति· 09:11 तक
शूल
करण
विष्टि· 00:00 तक
बव
वार
बुधवार
पक्ष
शुक्ल पक्ष

ग्रह स्थिति

सूर्य
राशिसिंह
नक्षत्रउत्तर फाल्गुनी
पद1
देशांतर147°43'42"
चन्द्रमा
राशिकुम्भ
नक्षत्रशतभिषा
पद4
देशांतर317°12'47"

राशि

चंद्र राशि
कुम्भ
सूर्य राशि
सिंह

चिच्ली — शुभ-अशुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 — 05:13
प्रातः सन्ध्या
05:13 — 06:49
सूर्योदय
06:01
अभिजित मुहूर्त
11:46 — 12:34
अमृत कालविशेष
07:33 — 09:06
विजय मुहूर्त
15:51 — 16:40
गोधूलि मुहूर्त
17:55 — 18:43
सूर्यास्त
18:19
सायाह्न सन्ध्या
18:22 — 19:31
निशिता मुहूर्त
23:46 — 00:34
राहु काल
12:10 — 13:42
यमगंड काल
06:01 — 07:33
गुलिक काल
10:38 — 12:10
प्रथम दुर्मुहूर्त
10:38 — 11:24
चंद्रोदय
17:51
चंद्रास्त
05:17
मध्याह्न
12:10

हिन्दू पंचांग — संवत् एवं मास

चन्द्र माह (पूर्णिमान्त)
भाद्रपद
चन्द्र माह (अमान्त)
भाद्रपद
पक्ष
शुक्ल पक्ष
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1949
गुजराती संवत्
2082

नक्षत्र विस्तार

नक्षत्र पद
पद 4
शतभिषा
नक्षत्र स्वामी
राहु
नक्षत्र देवता
वरुण
सूर्य नक्षत्र
उत्तर फाल्गुनी
पद 1स्वामी: सूर्य

ऋतु एवं अयन

वैदिक ऋतु
वर्षा
द्रिक ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

दिनमान एवं रात्रिमान

दिनमान
12 घण्टे 17 मिनट 27 सेकण्ड
30 घटी 44 पल
रात्रिमान
11 घण्टे 42 मिनट 33 सेकण्ड
29 घटी 16 पल
मध्याह्न (सौर)
12:10
सूर्य का उच्चतम बिन्दु

दिन का चौघड़िया — 15 सितंबर 2027, बुधवार

अमृतशुभलाभचरकालउद्वेगरोग
06:0107:33
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
07:3309:06
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
09:0610:38
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
10:3812:10
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
12:1013:42
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
13:4215:14
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
15:1416:46
चर
यात्रा, वाहन चालन
16:4618:19
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी

रात का चौघड़िया

18:1919:46
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
19:4621:14
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
21:1422:42
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
22:4200:10
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
00:1001:38
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
01:3803:06
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
03:0604:33
चर
यात्रा, वाहन चालन
04:3306:01
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी

चिच्ली पंचांग — सितंबर 2027

123456789101112131415161718192021222324252627282930

अन्य शहरों का पंचांग — 15 सितंबर 2027, बुधवार

दिल्लीमुंबईकोलकाताचेन्नईबेंगलुरुहैदराबादअहमदाबादपुणेजयपुरलखनऊवाराणसीप्रयागराज

चिच्ली पंचांग — 15 सितंबर 2027, बुधवार

चिच्ली (मध्य प्रदेश) के लिए 15 सितंबर 2027, बुधवार का सम्पूर्ण हिन्दू पंचांग यहाँ प्रस्तुत है। पंचांग के पाँच अंग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — के साथ-साथ सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल, यमगंड काल, गुलिक काल, ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और चौघड़िया की सटीक जानकारी दी गई है।

यह पंचांग चिच्ली के अक्षांश-देशांतर के अनुसार खगोलीय गणना पर आधारित है, जिससे सूर्योदय और अन्य समय स्थानीय रूप से सटीक हैं। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, व्रत या मुहूर्त के लिए अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चिच्ली में 15 सितंबर 2027, बुधवार को सूर्योदय कब है?

चिच्ली में 15 सितंबर 2027, बुधवार को सूर्योदय 06:01 बजे और सूर्यास्त 18:19 बजे है। ये समय खगोलीय गणना के आधार पर सटीक हैं।

चिच्ली में 15 सितंबर 2027, बुधवार को राहु काल कब है?

चिच्ली में 15 सितंबर 2027, बुधवार को राहु काल 12:10 से 13:42 तक है। इस समय नए कार्य प्रारंभ न करें।

चिच्ली में 15 सितंबर 2027, बुधवार को तिथि क्या है?

चिच्ली में 15 सितंबर 2027, बुधवार को शुक्ल पूर्णिमा तिथि है।

पंचांग के पाँच अंग कौन से हैं?

पंचांग के पाँच अंग हैं — तिथि (चंद्र दिन), नक्षत्र (चंद्र मंडल), योग (सूर्य-चंद्र संयोग), करण (अर्ध-तिथि) और वार (सप्ताह का दिन)। ये पाँचों मिलकर किसी भी दिन की शुभता निर्धारित करते हैं।

अभिजित मुहूर्त किसे कहते हैं?

अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय है, जो सौर मध्याह्न (solar noon) के आसपास 48 मिनट का होता है। बृहत्संहिता के अनुसार यह दिन का आठवाँ मुहूर्त है।