ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
Lauri, मध्य प्रदेश

Lauri — पंचांग

21 जनवरी 2027, गुरुवार

सूर्योदय
06:56
सूर्यास्त
17:46
चंद्रोदय
16:29
चंद्रास्त
05:45
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जनवरी 2027 — मासिक पंचांग

सर्वार्थ सिद्धि योग
21 जनवरी 2027, गुरुवार को सर्वार्थ सिद्धि योग है — सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम दिन

पंचांग — पाँच अंग

तिथि
शुक्ल चतुर्दशी
00:00 तक
अगली: शुक्ल पूर्णिमा
प्रगति28%
नक्षत्र
आर्द्रा (3 पाद)
13:23 तक
अगली: पुनर्वसु
स्वामी: राहु
योग
वैधृति
18:07 तक
अगला: विष्कम्भ
अशुभ
करण
गर
00:00 तक
अगला: वणिज
शुभ
वार
गुरुवार

पंचांग सार

तिथि
शुक्ल चतुर्दशी· 00:00 तक
शुक्ल पूर्णिमा
नक्षत्र
आर्द्रा · पद 3· 13:23 तक
पुनर्वसु
योग
वैधृति· 18:07 तक
विष्कम्भ
करण
गर· 00:00 तक
वणिज
वार
गुरुवार
पक्ष
शुक्ल पक्ष

ग्रह स्थिति

सूर्य
राशिमकर
नक्षत्रउत्तराषाढ़ा
पद3
देशांतर276°31'46"
चन्द्रमा
राशिमिथुन
नक्षत्रआर्द्रा
पद3
देशांतर75°54'38"

राशि

चंद्र राशि
मिथुन
सूर्य राशि
मकर

Lauri — शुभ-अशुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:20 — 06:08
प्रातः सन्ध्या
06:08 — 07:44
सूर्योदय
06:56
अभिजित मुहूर्त
11:57 — 12:45
अमृत कालविशेष
13:42 — 15:04
विजय मुहूर्त
15:36 — 16:19
गोधूलि मुहूर्त
17:22 — 18:10
सूर्यास्त
17:46
सायाह्न सन्ध्या
17:49 — 18:58
निशिता मुहूर्त
23:57 — 00:45
राहु काल
13:42 — 15:04
यमगंड काल
16:25 — 17:46
गुलिक काल
09:39 — 11:00
प्रथम दुर्मुहूर्त
11:41 — 12:21
द्वितीय दुर्मुहूर्त
16:25 — 17:05
चंद्रोदय
16:29
चंद्रास्त
05:45
मध्याह्न
12:21
सर्वार्थ सिद्धि योगसम्पूर्ण दिन

हिन्दू पंचांग — संवत् एवं मास

चन्द्र माह (पूर्णिमान्त)
माघ
चन्द्र माह (अमान्त)
माघ
पक्ष
शुक्ल पक्ष
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1948
गुजराती संवत्
2082

नक्षत्र विस्तार

नक्षत्र पद
पद 3
आर्द्रा
नक्षत्र स्वामी
राहु
नक्षत्र देवता
रुद्र
सूर्य नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा
पद 3स्वामी: सूर्य

ऋतु एवं अयन

वैदिक ऋतु
शिशिर
द्रिक ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

दिनमान एवं रात्रिमान

दिनमान
10 घण्टे 49 मिनट 41 सेकण्ड
27 घटी 4 पल
रात्रिमान
13 घण्टे 10 मिनट 19 सेकण्ड
32 घटी 56 पल
मध्याह्न (सौर)
12:21
सूर्य का उच्चतम बिन्दु

दिन का चौघड़िया — 21 जनवरी 2027, गुरुवार

अमृतशुभलाभचरकालउद्वेगरोग
06:5608:18
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
08:1809:39
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
09:3911:00
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
11:0012:21
चर
यात्रा, वाहन चालन
12:2113:42
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
13:4215:04
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
15:0416:25
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
16:2517:46
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य

रात का चौघड़िया

17:4619:25
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
19:2521:04
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
21:0422:42
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
22:4200:21
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
00:2102:00
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
02:0003:39
चर
यात्रा, वाहन चालन
03:3905:18
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
05:1806:56
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह

Lauri पंचांग — जनवरी 2027

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अन्य शहरों का पंचांग — 21 जनवरी 2027, गुरुवार

दिल्लीमुंबईकोलकाताचेन्नईबेंगलुरुहैदराबादअहमदाबादपुणेजयपुरलखनऊवाराणसीप्रयागराज

Lauri पंचांग — 21 जनवरी 2027, गुरुवार

Lauri (मध्य प्रदेश) के लिए 21 जनवरी 2027, गुरुवार का सम्पूर्ण हिन्दू पंचांग यहाँ प्रस्तुत है। पंचांग के पाँच अंग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — के साथ-साथ सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल, यमगंड काल, गुलिक काल, ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और चौघड़िया की सटीक जानकारी दी गई है।

यह पंचांग Lauri के अक्षांश-देशांतर के अनुसार खगोलीय गणना पर आधारित है, जिससे सूर्योदय और अन्य समय स्थानीय रूप से सटीक हैं। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, व्रत या मुहूर्त के लिए अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Lauri में 21 जनवरी 2027, गुरुवार को सूर्योदय कब है?

Lauri में 21 जनवरी 2027, गुरुवार को सूर्योदय 06:56 बजे और सूर्यास्त 17:46 बजे है। ये समय खगोलीय गणना के आधार पर सटीक हैं।

Lauri में 21 जनवरी 2027, गुरुवार को राहु काल कब है?

Lauri में 21 जनवरी 2027, गुरुवार को राहु काल 13:42 से 15:04 तक है। इस समय नए कार्य प्रारंभ न करें।

Lauri में 21 जनवरी 2027, गुरुवार को तिथि क्या है?

Lauri में 21 जनवरी 2027, गुरुवार को शुक्ल चतुर्दशी तिथि है।

पंचांग के पाँच अंग कौन से हैं?

पंचांग के पाँच अंग हैं — तिथि (चंद्र दिन), नक्षत्र (चंद्र मंडल), योग (सूर्य-चंद्र संयोग), करण (अर्ध-तिथि) और वार (सप्ताह का दिन)। ये पाँचों मिलकर किसी भी दिन की शुभता निर्धारित करते हैं।

अभिजित मुहूर्त किसे कहते हैं?

अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय है, जो सौर मध्याह्न (solar noon) के आसपास 48 मिनट का होता है। बृहत्संहिता के अनुसार यह दिन का आठवाँ मुहूर्त है।