ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
Lauri, मध्य प्रदेश

Lauri — पंचांग

4 फरवरी 2027, गुरुवार

सूर्योदय
06:52
सूर्यास्त
17:56
चंद्रोदय
05:17
चंद्रास्त
15:56
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फरवरी 2027 — मासिक पंचांग

सर्वार्थ सिद्धि योग
4 फरवरी 2027, गुरुवार को सर्वार्थ सिद्धि योग है — सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम दिन

पंचांग — पाँच अंग

तिथि
कृष्ण त्रयोदशी
16:31 तक
अगली: कृष्ण चतुर्दशी
प्रगति64%
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा (3 पाद)
15:31 तक
अगली: उत्तराषाढ़ा
स्वामी: शुक्र
योग
वज्र
19:40 तक
अगला: सिद्धि
अशुभ
करण
वणिज
00:00 तक
अगला: विष्टि
शुभ
वार
गुरुवार

पंचांग सार

तिथि
कृष्ण त्रयोदशी· 16:31 तक
कृष्ण चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा · पद 3· 15:31 तक
उत्तराषाढ़ा
योग
वज्र· 19:40 तक
सिद्धि
करण
वणिज· 00:00 तक
विष्टि
वार
गुरुवार
पक्ष
कृष्ण पक्ष

ग्रह स्थिति

सूर्य
राशिमकर
नक्षत्रश्रवण
पद4
देशांतर290°45'02"
चन्द्रमा
राशिधनु
नक्षत्रपूर्वाषाढ़ा
पद3
देशांतर262°23'43"

राशि

चंद्र राशि
धनु
सूर्य राशि
मकर

Lauri — शुभ-अशुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:16 — 06:04
प्रातः सन्ध्या
06:04 — 07:40
सूर्योदय
06:52
अभिजित मुहूर्त
12:00 — 12:48
अमृत कालविशेष
13:47 — 15:10
विजय मुहूर्त
15:43 — 16:28
गोधूलि मुहूर्त
17:32 — 18:20
सूर्यास्त
17:56
सायाह्न सन्ध्या
17:59 — 19:08
निशिता मुहूर्त
00:00 — 00:48
राहु काल
13:47 — 15:10
यमगंड काल
16:33 — 17:56
गुलिक काल
09:38 — 11:01
प्रथम दुर्मुहूर्त
11:42 — 12:24
द्वितीय दुर्मुहूर्त
16:33 — 17:15
चंद्रोदय
05:17
चंद्रास्त
15:56
मध्याह्न
12:24
सर्वार्थ सिद्धि योगसम्पूर्ण दिन

हिन्दू पंचांग — संवत् एवं मास

चन्द्र माह (पूर्णिमान्त)
फाल्गुन
चन्द्र माह (अमान्त)
माघ
पक्ष
कृष्ण पक्ष
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1948
गुजराती संवत्
2082

नक्षत्र विस्तार

नक्षत्र पद
पद 3
पूर्वाषाढ़ा
नक्षत्र स्वामी
शुक्र
नक्षत्र देवता
जल
सूर्य नक्षत्र
श्रवण
पद 4स्वामी: चंद्र

ऋतु एवं अयन

वैदिक ऋतु
शिशिर
द्रिक ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

दिनमान एवं रात्रिमान

दिनमान
11 घण्टे 04 मिनट 48 सेकण्ड
27 घटी 42 पल
रात्रिमान
12 घण्टे 55 मिनट 12 सेकण्ड
32 घटी 18 पल
मध्याह्न (सौर)
12:24
सूर्य का उच्चतम बिन्दु

दिन का चौघड़िया — 4 फरवरी 2027, गुरुवार

अमृतशुभलाभचरकालउद्वेगरोग
06:5208:15
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
08:1509:38
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
09:3811:01
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
11:0112:24
चर
यात्रा, वाहन चालन
12:2413:47
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
13:4715:10
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
15:1016:33
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
16:3317:56
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य

रात का चौघड़िया

17:5619:33
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
19:3321:10
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
21:1022:47
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
22:4700:24
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
00:2402:01
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
02:0103:38
चर
यात्रा, वाहन चालन
03:3805:15
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
05:1506:52
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह

Lauri पंचांग — फरवरी 2027

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अन्य शहरों का पंचांग — 4 फरवरी 2027, गुरुवार

दिल्लीमुंबईकोलकाताचेन्नईबेंगलुरुहैदराबादअहमदाबादपुणेजयपुरलखनऊवाराणसीप्रयागराज

Lauri पंचांग — 4 फरवरी 2027, गुरुवार

Lauri (मध्य प्रदेश) के लिए 4 फरवरी 2027, गुरुवार का सम्पूर्ण हिन्दू पंचांग यहाँ प्रस्तुत है। पंचांग के पाँच अंग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — के साथ-साथ सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल, यमगंड काल, गुलिक काल, ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और चौघड़िया की सटीक जानकारी दी गई है।

यह पंचांग Lauri के अक्षांश-देशांतर के अनुसार खगोलीय गणना पर आधारित है, जिससे सूर्योदय और अन्य समय स्थानीय रूप से सटीक हैं। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, व्रत या मुहूर्त के लिए अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Lauri में 4 फरवरी 2027, गुरुवार को सूर्योदय कब है?

Lauri में 4 फरवरी 2027, गुरुवार को सूर्योदय 06:52 बजे और सूर्यास्त 17:56 बजे है। ये समय खगोलीय गणना के आधार पर सटीक हैं।

Lauri में 4 फरवरी 2027, गुरुवार को राहु काल कब है?

Lauri में 4 फरवरी 2027, गुरुवार को राहु काल 13:47 से 15:10 तक है। इस समय नए कार्य प्रारंभ न करें।

Lauri में 4 फरवरी 2027, गुरुवार को तिथि क्या है?

Lauri में 4 फरवरी 2027, गुरुवार को कृष्ण त्रयोदशी तिथि है।

पंचांग के पाँच अंग कौन से हैं?

पंचांग के पाँच अंग हैं — तिथि (चंद्र दिन), नक्षत्र (चंद्र मंडल), योग (सूर्य-चंद्र संयोग), करण (अर्ध-तिथि) और वार (सप्ताह का दिन)। ये पाँचों मिलकर किसी भी दिन की शुभता निर्धारित करते हैं।

अभिजित मुहूर्त किसे कहते हैं?

अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय है, जो सौर मध्याह्न (solar noon) के आसपास 48 मिनट का होता है। बृहत्संहिता के अनुसार यह दिन का आठवाँ मुहूर्त है।