ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
वाराणसी, उत्तर प्रदेश

वाराणसी — पंचांग

13 अप्रैल 2027, मंगलवार

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
18:20
चंद्रोदय
10:41
चंद्रास्त
00:01
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अप्रैल 2027 — मासिक पंचांग

सर्वार्थ सिद्धि योग
13 अप्रैल 2027, मंगलवार को सर्वार्थ सिद्धि योग है — सभी शुभ कार्यों के लिए उत्तम दिन

पंचांग — पाँच अंग

तिथि
शुक्ल सप्तमी
17:30 तक
अगली: शुक्ल अष्टमी
प्रगति46%
नक्षत्र
आर्द्रा (3 पाद)
12:13 तक
अगली: पुनर्वसु
स्वामी: राहु
योग
अतिगंड
13:58 तक
अगला: सुकर्मा
अशुभ
करण
गर
06:32 तक
अगला: वणिज
शुभ
वार
मंगलवार

पंचांग सार

तिथि
शुक्ल सप्तमी· 17:30 तक
शुक्ल अष्टमी
नक्षत्र
आर्द्रा · पद 3· 12:13 तक
पुनर्वसु
योग
अतिगंड· 13:58 तक
सुकर्मा
करण
गर· 06:32 तक
वणिज
वार
मंगलवार
पक्ष
शुक्ल पक्ष

ग्रह स्थिति

सूर्य
राशिमीन
नक्षत्ररेवती
पद4
देशांतर358°37'30"
चन्द्रमा
राशिमिथुन
नक्षत्रआर्द्रा
पद3
देशांतर76°07'44"

राशि

चंद्र राशि
मिथुन
सूर्य राशि
मीन

वाराणसी — शुभ-अशुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:02 — 04:50
प्रातः सन्ध्या
04:50 — 06:26
सूर्योदय
05:38
अभिजित मुहूर्त
11:35 — 12:23
अमृत कालविशेष
11:59 — 13:34
विजय मुहूर्त
15:47 — 16:38
गोधूलि मुहूर्त
17:56 — 18:44
सूर्यास्त
18:20
सायाह्न सन्ध्या
18:23 — 19:32
निशिता मुहूर्त
23:35 — 00:23
राहु काल
15:09 — 16:45
यमगंड काल
07:13 — 08:49
गुलिक काल
11:59 — 13:34
प्रथम दुर्मुहूर्त
09:36 — 10:24
द्वितीय दुर्मुहूर्त
13:34 — 14:22
चंद्रोदय
10:41
चंद्रास्त
00:01
मध्याह्न
11:59
सर्वार्थ सिद्धि योगसम्पूर्ण दिन

हिन्दू पंचांग — संवत् एवं मास

चन्द्र माह (पूर्णिमान्त)
चैत्र
चन्द्र माह (अमान्त)
चैत्र
पक्ष
शुक्ल पक्ष
विक्रम संवत्
2084
शक संवत्
1949
गुजराती संवत्
2082

नक्षत्र विस्तार

नक्षत्र पद
पद 3
आर्द्रा
नक्षत्र स्वामी
राहु
नक्षत्र देवता
रुद्र
सूर्य नक्षत्र
रेवती
पद 4स्वामी: बुध

ऋतु एवं अयन

वैदिक ऋतु
वसन्त
द्रिक ऋतु
वसन्त
अयन
उत्तरायण

दिनमान एवं रात्रिमान

दिनमान
12 घण्टे 41 मिनट 38 सेकण्ड
31 घटी 44 पल
रात्रिमान
11 घण्टे 18 मिनट 22 सेकण्ड
28 घटी 16 पल
मध्याह्न (सौर)
11:59
सूर्य का उच्चतम बिन्दु

दिन का चौघड़िया — 13 अप्रैल 2027, मंगलवार

अमृतशुभलाभचरकालउद्वेगरोग
05:3807:13
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
07:1308:49
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
08:4910:24
चर
यात्रा, वाहन चालन
10:2411:59
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
11:5913:34
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
13:3415:09
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
15:0916:45
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
16:4518:20
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें

रात का चौघड़िया

18:2019:45
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें
19:4521:09
शुभ
विवाह, गृह प्रवेश, मांगलिक कार्य
21:0922:34
रोग
स्वास्थ्य निर्णय टालें
22:3423:59
उद्वेग
नया काम प्रारंभ न करें
23:5901:24
चर
यात्रा, वाहन चालन
01:2402:49
लाभ
व्यापार, धन लेनदेन, नौकरी
02:4904:13
अमृत
सभी शुभ कार्य, पूजा, विवाह
04:1305:38
काल
महत्वपूर्ण निर्णय टालें

वाराणसी पंचांग — अप्रैल 2027

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अन्य शहरों का पंचांग — 13 अप्रैल 2027, मंगलवार

दिल्लीमुंबईकोलकाताचेन्नईबेंगलुरुहैदराबादअहमदाबादपुणेजयपुरलखनऊप्रयागराजहरिद्वार

वाराणसी पंचांग — 13 अप्रैल 2027, मंगलवार

वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के लिए 13 अप्रैल 2027, मंगलवार का सम्पूर्ण हिन्दू पंचांग यहाँ प्रस्तुत है। पंचांग के पाँच अंग — तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार — के साथ-साथ सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, राहु काल, यमगंड काल, गुलिक काल, ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त और चौघड़िया की सटीक जानकारी दी गई है।

यह पंचांग वाराणसी के अक्षांश-देशांतर के अनुसार खगोलीय गणना पर आधारित है, जिससे सूर्योदय और अन्य समय स्थानीय रूप से सटीक हैं। किसी भी शुभ कार्य, पूजा, व्रत या मुहूर्त के लिए अपने शहर का पंचांग अवश्य देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वाराणसी में 13 अप्रैल 2027, मंगलवार को सूर्योदय कब है?

वाराणसी में 13 अप्रैल 2027, मंगलवार को सूर्योदय 05:38 बजे और सूर्यास्त 18:20 बजे है। ये समय खगोलीय गणना के आधार पर सटीक हैं।

वाराणसी में 13 अप्रैल 2027, मंगलवार को राहु काल कब है?

वाराणसी में 13 अप्रैल 2027, मंगलवार को राहु काल 15:09 से 16:45 तक है। इस समय नए कार्य प्रारंभ न करें।

वाराणसी में 13 अप्रैल 2027, मंगलवार को तिथि क्या है?

वाराणसी में 13 अप्रैल 2027, मंगलवार को शुक्ल सप्तमी तिथि है।

पंचांग के पाँच अंग कौन से हैं?

पंचांग के पाँच अंग हैं — तिथि (चंद्र दिन), नक्षत्र (चंद्र मंडल), योग (सूर्य-चंद्र संयोग), करण (अर्ध-तिथि) और वार (सप्ताह का दिन)। ये पाँचों मिलकर किसी भी दिन की शुभता निर्धारित करते हैं।

अभिजित मुहूर्त किसे कहते हैं?

अभिजित मुहूर्त दिन का सबसे शुभ समय है, जो सौर मध्याह्न (solar noon) के आसपास 48 मिनट का होता है। बृहत्संहिता के अनुसार यह दिन का आठवाँ मुहूर्त है।