भैरव मंत्र
ॐ अञ्जनीसुताय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
माता अंजनी के परम प्रिय पुत्र को नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
शयन के समय, प्रातः जागने पर और विशेषकर यात्रा के दौरान इनका जप करने से व्यक्ति अकाल-मृत्यु के भय से मुक्त होता है, राजद्वारे (कोर्ट-कचहरी) में विजयी होता है और उसे समस्त संपत्तियों की प्राप्ति होती है
विस्तृत लाभ
शयन के समय, प्रातः जागने पर और विशेषकर यात्रा के दौरान इनका जप करने से व्यक्ति अकाल-मृत्यु के भय से मुक्त होता है, राजद्वारे (कोर्ट-कचहरी) में विजयी होता है और उसे समस्त संपत्तियों की प्राप्ति होती है 35।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अयं यः सृञ्जये पुरो दैववाते समिध्यते । द्युमाँ अमित्रदम्भनः ॥
ॐ कलिकल्मषनाशिन्यै नमः
ॐ श्रीं ह्रीं पातु मे ग्रीवां स्कन्धं मे श्रीं सदाऽवतु। (स्वरूप: श्रीं ह्रीं स्वरूपा | लाभ: गर्दन और कंधों की रक्षा | अर्थ: देवी मेरी ग्रीवा और स्कंध की रक्षा करें) 8
ॐ सर्वाबाधा विनिर्मुक्तो, धन धान्यः सुतान्वितः। मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः ॐ।
ॐ विष्णवे नमः
ॐ ह्रीं बटुकाय मम प्रत्यक्ष दर्शय दर्शय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।