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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 2

भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपकाल भैरव
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी, शिव स्वरूप नीलकंठ भैरव का मैं भजन करता हूँ।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

संसार-सागर से मुक्ति और ईप्सित (इच्छित) अर्थ की प्राप्ति

विस्तृत लाभ

संसार-सागर से मुक्ति और ईप्सित (इच्छित) अर्थ की प्राप्ति।

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