शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 3
शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणं श्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपकाल भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हाथों में त्रिशूल, पाश और दंड धारण करने वाले निरोगी आदिदेव की वंदना करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
रोगों से मुक्ति (निरामयम्) और अस्त्र-शस्त्रों के भय का नाश
विस्तृत लाभ
रोगों से मुक्ति (निरामयम्) और अस्त्र-शस्त्रों के भय का नाश।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ब्रह्ममुरारिसुरार्चितलिङ्गं निर्मलभासितशोभितलिङ्गम्। जन्मजदुःखविनाशकलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ॐ विश्वशक्त्यै नमः
ॐ कृष्णसङ्गविलासिन्यै नमः
ॐ पद्मालयायै नमः
तप्तकाञ्चन संकाशश्चाष्टहस्तो महातनुः । दीप्ताङ्कुशं शरं चाक्षं दन्तं दक्षे वहन् करैः ॥ वामे पाशं कार्मुकं च लतां जम्बू दधत् करैः । रक्तांशुकः सदा भूयाद् दुर्गागणपतिर्मुदे ॥
ॐ कुलमार्गप्रदर्शिन्यै नमः