शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ वाग्भवाख्याय नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारराजसिक संपदा मंत्र
स्वरूपस्वर्णाकर्षण भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सरस्वती/वाक् बीज के साक्षात् स्वरूप हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्वर्ण-ऐश्वर्य की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
स्वर्ण-ऐश्वर्य की प्राप्ति
जप काल
शुक्रवार को यंत्र पर कुमकुम अर्पण
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
धृत पाशाङ्कुश कल्पलता स्वरदश्च बीजपूरयुतः । शशिशकल कलितमौली त्रिलोचनोऽरुणश्च गजवदनः ॥ भासुरभूषण दीप्तो बृहदुदर पद्म विष्टरोल्लसितः । विघ्नपयोधरपवनः करधृत कमलः सदास्तु भूत्यै ॥
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
ॐ मालिन्यै नमः
ॐ कलानन्दायै नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ओङ्कारः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ अनीश्वराय नमः