शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ चन्द्रावली पातु गण्डं।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपचन्द्रावली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
चन्द्रावली मेरे गालों की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: गण्ड (गालों) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: गण्ड (गालों) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीहरिप्रियायै नमः
तव करकमलवरे नखमद्भुतशृंगं दलितहिरण्यकशिपुतनुभृंगम्। केशव धृतनरहरिरूप जय जगदीश हरे॥
ॐ सर्वसिद्धायै नमः
मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्। वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥
ॐ करुणामृतसागरायै नमः
ॐ वल्ली देवसेनासमेत श्री सुब्रह्मण्यस्वामिने नमः