भैरव मंत्र
मखेश्वरि क्रियेश्वरि स्वधेश्वरि सुरेश्वरि त्रिवेदभारतीश्वरि प्रमाणशासनेश्वरि। रमेश्वरि क्षमेश्वरि प्रमोदकाननेश्वरि व्रजेश्वरि व्रजाधिपे श्रीराधिके नमोऽस्तु ते॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे यज्ञों, क्रियाओं, देवताओं, वेदों, प्रमाणों, क्षमा, और प्रमोद-वन की ईश्वरी! हे व्रज की अधिष्ठात्री श्री राधिके! आपको नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
लाभ: सभी कार्यों और अनुष्ठानों में सफलता
विस्तृत लाभ
लाभ: सभी कार्यों और अनुष्ठानों में सफलता।
टिप्पणी
यहाँ इस सिद्ध स्तोत्र के सभी 19 श्लोकों को मंत्र रूप में, उनके अर्थ और लाभ सहित प्रस्तुत किया गया है। सभी का
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अक्षमालां कुठारं च रत्नपात्रं स्वदन्तकम् । धत्ते करैर्विघ्नराजो ढुण्ढिनाम मुदेऽस्तु नः ॥
ॐ साक्षिणे नमः
ॐ वेदमन्त्राभिषेचिताय नमः
अहं राष्ट्री सङ्गमनी वसूनां चिकितुषी प्रथमा यज्ञियानाम्। तां मा देवा व्यदधुः पुरुत्रा भूरिस्थात्रां भूर्यावेशयन्तीम्॥
देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम्। दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ॐ सहस्रबाहवे नमः