शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
श्री राम गायत्री मंत्र
ॐ दाशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमर्यादा पुरुषोत्तम राम
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम दशरथनंदन और सीतापति श्री राम का ध्यान करते हैं; वे भगवान राम हमारी बुद्धि को शुद्ध करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आदर्श आचरण, पारिवारिक सुख और नैतिक मूल्यों की रक्षा
विस्तृत लाभ
आदर्श आचरण, पारिवारिक सुख और नैतिक मूल्यों की रक्षा 11।
जप काल
नित्य प्रातः काल।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कलावत्यै नमः
ॐ श्रीं सौं शरवणभवाय नमः
ॐ नमो बजर का कोठा, जिस पर पिंड हमारा पेठा। ईश्वर कुंजी ब्रह्मा का ताला, मेरे आठों धाम का यती हनुमंत रखवाला।
ॐ ज्वालाचक्राय स्वाहा – शिरसे स्वाहा
करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥
अधरौष्ठं हृषीकेशो दन्तपंक्तिं गदाग्रजः । रासेश्वरश्च रसनां तालुकं वामनो विभुः ॥