शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 1
देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजं व्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरम्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपकाल भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
इंद्र द्वारा सेवित, सर्प का जनेऊ धारण करने वाले कृपालु भैरव का मैं भजन करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
देवराज इंद्र के समान वैभव की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
देवराज इंद्र के समान वैभव की प्राप्ति।
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