शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ दिव्याय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपदिव्य रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो भौतिकता से परे, पूर्णतः अलौकिक हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ध्यान और समाधि में दिव्य अनुभवों व दर्शन की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
ध्यान और समाधि में दिव्य अनुभवों व दर्शन की प्राप्ति।
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ॐ शक्तिधराय नमः
ॐ कर्बूराक्षरायै नमः
नैऋत्ये क्रोध भैरवाय नमः नैऋत्ये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ विष्णुप्रियाय नमः
अग्रतश्चतुरो वेदान् पृष्ठतः सशरं धनुः। उभाभ्यां च समर्थोऽहं शापादपि शरादपि॥
ॐ श्रीमन्मन्दकटाक्षलब्धविभवब्रह्मेन्द्रगङ्गाधरां, त्वां त्रैलोक्यकुटुम्बिनीं सरसिजां वन्दे मुकुन्दप्रियाम्॥