शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ दुर्गमेश्वर्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनामावली मंत्र | जप समय: प्रातः या घोर संकट काल |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सभी दुर्गम सत्ताओं और ब्रह्मांड की ईश्वरी हैं।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ पूर्णायै नमः
ॐ उज्जृम्भाय नमः
श्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा वक्षः सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: हृदय व वक्ष-स्थल की रक्षा | अर्थ: विद्या देवी मेरे वक्ष की रक्षा करें) 8
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पूरुषानहम्॥
ॐ शूलपाणये नमः।
ॐ कमलनेत्रायै नमः