भैरव मंत्र
ॐ कलाधारायै नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
अर्धचंद्र और संपूर्ण स्त्री-ऊर्जा को धारण करने वाली।
इस मंत्र से क्या होगा?
स्त्री-ऊर्जा (मातृ-शक्ति) का जागरण और संतुलन
विस्तृत लाभ
स्त्री-ऊर्जा (मातृ-शक्ति) का जागरण और संतुलन।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नवदुर्गायै नमः ॐ महाकाल्यै नमः ॐ ब्रह्माविष्णुशिवात्मिकायै नमः।
ॐ कङ्कालधारिणे नमः।
ॐ अनुकम्पाप्रदायै राधायै नमः
ॐ महेश्वराय नमः
त्वं गुणत्रयातीतः ॥ त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः ॥ त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम् ॥ त्वं शक्तित्रयात्मकः ॥ त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम् ॥
ॐ श्रीं ह्रीं भगवत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: भगवती | लाभ: नेत्रों और सूक्ष्म दृष्टि की रक्षा | अर्थ: श्रीं ह्रीं स्वरूपा भगवती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें) 8