शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ कपिसेनानायकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपसेनापति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
श्री राम की वानर सेना के मुख्य सेनानायक को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वेदत्रयप्रपूज्याय नमः
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्। त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥
जय श्री कृष्ण चैतन्य प्रभु नित्यानन्द श्री अद्वैत गदाधर श्रीवासादि गौर भक्त वृन्द
ॐ ब्रह्मणस्पते त्वमस्य यन्ता सूक्तस्य बोधि तनयं च जिन्व । विश्वं तद्भद्रं यदवन्ति देवा बृहद्वदेम विदथे सुवीराः ॥
त्वं देवि सरस्वत्यवा वाजेषु वाजिनि। रदा पूषेव नः सनिम्॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये पञ्चमहाभूतानि तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः