शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ कीर्त्यै नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारपाञ्चरात्र अनुचर मंत्र (कीर्ति)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके एक मंद कटाक्ष (कृपा-दृष्टि) से ब्रह्मा, इन्द्र और शिव वैभव प्राप्त करते हैं, उन त्रैलोक्य को अपना कुटुंब मानने वाली, कमल पर विराजने वाली मुकुंद-प्रिया की मैं वंदना करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
निर्मल यश और ख्याति का विश्वव्यापी प्रसार
02
देवी की अनुचरी शक्तियों (कीर्ति, जया, माया) में से एक
विस्तृत लाभ
निर्मल यश और ख्याति का विश्वव्यापी प्रसार। देवी की अनुचरी शक्तियों (कीर्ति, जया, माया) में से एक 39।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र