शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ कृष्णसञ्जीवन्यै राधायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो कृष्ण के प्राणों की संजीवनी बूटी हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
गंभीर रोगों और मृत्यु-भय से रक्षा
विस्तृत लाभ
गंभीर रोगों और मृत्यु-भय से रक्षा।
जप काल
तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;
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ॐ जगच्चक्राय स्वाहा – शिखायै वषट्
ॐ सुरारिभिदे नमः
चलत्कुण्डलं भ्रू सुनेत्रं विशालं। प्रसन्नाननं नीलकण्ठं दयालम्॥
सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥ 17
आग्नेये रूरु भैरवाय नमः आग्नेये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ ऋक्षवानरसङ्घातिने नमः