पंचमुखी हनुमान ध्यान मंत्र
पंचास्यमच्युतमनेकविचित्रवीर्यं श्रीशंखचक्ररमणीयभुजाग्रदेशम्। पीताम्बरं मकरकुण्डलनूपुराङ्गं ध्यायेतितं कपिवरं हृदि भावयामि॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिनके पाँच मुख हैं, जो अच्युत (कभी न गिरने वाले) हैं, अनेक विचित्र शक्तियों के स्वामी हैं, जिनके हाथों में शंख-चक्र सुशोभित हैं, जिन्होंने पीताम्बर धारण किया है और मकर-कुंडल पहने हैं, मैं उन वानर श्रेष्ठ का अपने हृदय में ध्यान करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
आलस्य और दरिद्रता का नाश होता है, ध्यान में अगाध एकाग्रता आती है और अतींद्रिय शक्तियों का जागरण होता है
विस्तृत लाभ
आलस्य और दरिद्रता का नाश होता है, ध्यान में अगाध एकाग्रता आती है और अतींद्रिय शक्तियों का जागरण होता है 34।
जप काल
पंचमुखी कवच पाठ से पूर्व हाथ में जल या पुष्प लेकर ध्यान।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ गोवर्धनवरप्रदाय नमः
ॐ ह्लीं श्रीराधिकायै नमः
या श्रीः स्वयं सुकृतिनां भवनेष्वलक्ष्मीः पापात्मनां कृतधियां हृदयेषु बुद्धिः। श्रद्धा सतां कुलजनप्रभवस्य लज्जा तां त्वां नताः स्म परिपालय देवि विश्वम्॥ 18
ॐ शिवशिक्षापराय नमः
ॐ महाकर्णाय विद्महे वक्रतुण्डाय धीमहि । तन्नो दन्ती प्रचोदयात् ॥
करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं वा श्रवणनयनजं वा मानसंवापराधं। विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो॥