शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ पुलिन्दकन्याभर्त्रे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपवल्ली-नाथ
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
पुलिंद कन्या (वन-पुत्री वल्ली) के स्वामी को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सहज प्रेम और प्रकृति से जुड़ाव
विस्तृत लाभ
सहज प्रेम और प्रकृति से जुड़ाव।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कलावत्यै नमः
ॐ कङ्कालधारिणे नमः।
ॐ कपालिने नमः
ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भूत, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।
हरि राम हरि राम, राम राम हरि हरि (Hari Ram Hari Ram, Rama Rama Hari Hari)
ॐ वाण्यै नमः