शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ नागाशनरथस्थिताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपमयूर-रथ आरूढ़
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
नागाशन (नागों को खाने वाले मयूर) के रथ पर स्थित देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्प-दोष, कालसर्प योग और विष-बाधा का निवारण
विस्तृत लाभ
सर्प-दोष, कालसर्प योग और विष-बाधा का निवारण।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अमृतं तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ दुराराध्याय नमः
ॐ श्रीं नमः। (अथवा 'श्रीं')
देवीं सरस्वतीं सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं देवीं देवीं सरस्वतीं वाजेभिः॥ सरस्वतीं वाजेभिर्वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिस्सरस्वतीं सरस्वतीं वाजेभिर्वाजिनीवतीं॥ वाजेभिर्वाजिनीवतीं वाजिनीवतीं वाजेभिर्वाजेभिर्वाजिनीवतीं। वाजिनीवतीति वाजिनी-वती॥
ॐ सनातनाय नमः
ॐ अजाय नमः