शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 6
रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकं नित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपकाल भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके चरणों में रत्नजड़ित पादुकाएं हैं, उन अद्वितीय देवता को नमन है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
निरंजन (माया से रहित) अवस्था की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
निरंजन (माया से रहित) अवस्था की प्राप्ति।
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