भार्गव कवच (सभा-विजय एवं वाक्-सिद्धि)
सभासु वदतां श्रेष्ठो राज्ञां भवति च प्रियः। वैदिकं तान्त्रिकं चैव मान्त्रिकं ज्ञानमुत्तमम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
...वह व्यक्ति सभाओं में बोलने वालों में सबसे श्रेष्ठ और राजाओं का प्रिय हो जाता है। उसे वैदिक, तांत्रिक और मान्त्रिक—तीनों प्रकार का उत्तम ज्ञान स्वतः प्राप्त हो जाता है।
इस मंत्र से क्या होगा?
उत्कृष्ट वाक्-सिद्धि, सभा में सम्मान, और अधिकारियों (राजाओं) का परम प्रिय होना
विस्तृत लाभ
उत्कृष्ट वाक्-सिद्धि, सभा में सम्मान, और अधिकारियों (राजाओं) का परम प्रिय होना।
जप काल
वाद-विवाद, न्यायालय या साक्षात्कार से पूर्व।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान् विन्देयं पूरुषानहम्॥
ॐ ह्रीं वाग्वादिन्यै स्वाहा नासां मे सर्वतोऽवतु। (स्वरूप: वाग्वादिनी | लाभ: प्राण-वायु और नासिका की रक्षा | अर्थ: वाग्वादिनी नासिका की सभी प्रकार से रक्षा करें) 8
ॐ क्रीं कालिकायै नमः॥
ॐ श्रीदामप्रियाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये भगवान्विष्णुः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ कच्छपेशाय विद्महे महाकूर्माय धीमहि तन्नो कूर्मः प्रचोदयात्।