शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ स्कन्धौ मे पातु भद्रोऽसौ स्कन्ध-भुजायुधः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपकंधे / भद्र स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
दिव्य आयुधों से सुसज्जित भुजाओं वाले प्रभु मेरे कन्धों की रक्षा करें। (उत्तरदायित्व वहन करने की शक्ति)।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
देवि प्रसीद परिपालय नोऽरिभीतेर्नित्यं यथासुरवधादधुनैव सद्यः। पापानि सर्वजगतां प्रशमं नयाशु उत्पातपाकजनितांश्च महोपसर्गान्॥ 18
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं सौ: जगत्प्रसूत्यै नमः।
आ नो दिवो बृहतः पर्वतादा सरस्वती यजता गन्तु यज्ञम्। हवं देवी जुजुषाणा घृताची शग्मां नो वाचमुशती शृणोतु॥
ॐ भक्तवत्सलाय नमः
ॐ नवशक्तिसमावृताय नमः
ॐ गान्धर्वायै नमः