शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ संसारवैरिणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपभव-भयहारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
संसार (जन्म-मृत्यु के चक्र) के शत्रु (नाशक) को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संसार-चक्र से मुक्ति
विस्तृत लाभ
संसार-चक्र से मुक्ति
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं गं सौम्याय गणपतये वर वरद सर्वजनं मे वशमानय स्वाहा ॥
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्।
ॐ कात्यायनाय विद्महे कन्याकुमारि धीमहि। तन्नो दुर्गा प्रचोदयात्॥
ॐ भवरोगस्यभेषजाय नमः
जो महर्षि भृगु के पवित्र वंश को आनंदित करने वाले हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: कुल-गोत्र की वृद्धि) 19।
ॐ मनोजवाय नमः