शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 4
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहं भक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपकाल भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
भोग और मोक्ष दोनों प्रदान करने वाले भक्तवत्सल भैरव का ध्यान करता हूँ।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भौतिक भोग और आध्यात्मिक मोक्ष दोनों की एक साथ प्राप्ति
विस्तृत लाभ
भौतिक भोग और आध्यात्मिक मोक्ष दोनों की एक साथ प्राप्ति।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
परशुं दक्षिणे हस्ते वामे च दधतं धनुः। रम्यं भृगुकुलोत्तंसं घनश्यामं मनोहरम्॥
ॐ शाश्वताय नमः
ॐ दाशरथाय विद्महे सीतावल्लभाय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।
ॐ पद्मिन्यै नमः
मयि मेधां मयि प्रजां मय्यग्निस्तेजो दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयीन्द्र इन्द्रियं दधातु। मयि मेधां मयि प्रजां मयि सूर्यो भ्राजो दधातु॥