शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ तत्त्वरूपिणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपपरमतत्त्व
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो स्वयं परमतत्त्व और अंतिम सत्य के साक्षात् रूप हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
आत्मज्ञान
विस्तृत लाभ
आत्मज्ञान
जप काल
ध्यान काल
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कङ्कालधारिणे नमः।
बालार्कारुणकान्तिर्वामे बालां वहन् अङ्के । लसदिन्दीवर हस्तं गौराङ्गीं रत्नशोभाढ्याम् ॥ दक्षे अङ्कुश वरदानं वामे पाशं च पायसं पात्रम् । नीलांशुक समान पीठपद्मारुणे तिष्ठन् संकटहरणः पायात् ॥
ॐ गङ्गासुताय नमः
ॐ कुलकामिन्यै नमः
तडित्सुवर्णचम्पकप्रदीप्तगौरविग्रहे मुखप्रभापरास्तकोटिशारदेन्दुमण्डले। विचित्रचित्रसञ्चरच्चकोरशावलोचने कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ आञ्जनेयाय नमः