शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ त्रयीमूर्त्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपत्रयीमूर्ति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
तीनों वेदों की मूर्ति
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ऋग्, यजु और साम—तीनों वेदों के ज्ञान की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
ऋग्, यजु और साम—तीनों वेदों के ज्ञान की प्राप्ति
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कर्पूरामृतपायिन्यै नमः
ॐ जितेन्द्रियाय नमः
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
श्रीमन् नारायण चरणौ शरणं प्रपद्ये। श्रीमते नारायणाय नमः॥
ॐ सुरारिघ्ने नमः
ॐ काल्यै नमः