शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
अष्टरूप ब्रह्म मंत्र
त्वं वाङ्मयस्त्वं चिन्मयः ॥ त्वमानन्दमयस्त्वं ब्रह्ममयः ॥ त्वं सच्चिदानन्दाऽद्वितीयोऽसि ॥ त्वं प्रत्यक्षं ब्रह्मासि ॥ त्वं ज्ञानमयो विज्ञानमयोऽसि ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्वरूप स्तुति मंत्र
स्वरूपसच्चिदानंद गणपति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
आप वाणीमय, चिन्मय (चेतना), आनंदमय और ब्रह्ममय हैं। आप अद्वितीय सच्चिदानंद हैं, आप ही प्रत्यक्ष ब्रह्म हैं और आप ही ज्ञान व विज्ञान से युक्त हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
बौद्धिक विकास, तनाव से मुक्ति और आध्यात्मिक उत्थान
विस्तृत लाभ
बौद्धिक विकास, तनाव से मुक्ति और आध्यात्मिक उत्थान।
जप काल
प्रातःकालीन ध्यान और ज्ञानार्जन के समय।
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