शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ विभावर्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपविभावरी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
रात्रि
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अज्ञान की रात्रि में प्रकाशक बनना
विस्तृत लाभ
अज्ञान की रात्रि में प्रकाशक बनना
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
मखेश्वरि क्रियेश्वरि स्वधेश्वरि सुरेश्वरि त्रिवेदभारतीश्वरि प्रमाणशासनेश्वरि। रमेश्वरि क्षमेश्वरि प्रमोदकाननेश्वरि व्रजेश्वरि व्रजाधिपे श्रीराधिके नमोऽस्तु ते॥
ॐ महाशक्तये नमः
गोपीजनवल्लभाय स्वाहा
ॐ चण्ड्यै नमः
ॐ नमो भगवते महोग्र दिग्बन्धन नरसिंहाय ज्वालामुखाय अग्निनेत्राय... हन हन दह दह पच पच बन्ध बन्ध कील कील स्वाहा
वाक्च मे मनश्च मे चक्षुश्च मे श्रोत्रं च मे...