शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ विश्वकर्मणे नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपविश्व निर्माता
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो इस विश्व के समस्त कर्मों को रूप देने वाले सृष्टिकर्ता हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कौशल
विस्तृत लाभ
कौशल
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कमलासनसन्तुष्टायै नमः
नित्यलीलाप्रवेशं च ददाति श्रीव्रजाधिपः। अतः परतरं प्रार्थ्यं वैष्णवानां न विद्यते॥
ॐ नन्दव्रजजनानन्दिने नमः
देवगणार्चितसेवितलिङ्गं भावैर्भक्तिभिरेव च लिङ्गम्। दिनकरकोटिप्रभाकरलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ॐ नारसिंहाय नमः
आ नो दिवो बृहतः पर्वतादा सरस्वती यजता गन्तु यज्ञम्। हवं देवी जुजुषाणा घृताची शग्मां नो वाचमुशती शृणोतु॥