ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥

ॐ देवकीनन्दनाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारश्रीकृष्ण गायत्री मन्त्र / गायत्री मन्त्र
स्वरूपवासुदेव / देवकीनन्दन कृष्ण
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

ॐ, हम देवकीनन्दन को जानते हैं, उन वासुदेव का हम ध्यान करते हैं। वे श्रीकृष्ण हमारी प्रज्ञा (बुद्धि) को सन्मार्ग पर प्रेरित करें 30।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

उच्च आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार, बौद्धिक स्पष्टता (Illumination of mind), जीवन के कार्यों में सफलता और अज्ञानता का अन्धकार दूर होना

विस्तृत लाभ

उच्च आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार, बौद्धिक स्पष्टता (Illumination of mind), जीवन के कार्यों में सफलता और अज्ञानता का अन्धकार दूर होना 30।

जप काल

प्रातः एवं सन्ध्या काल में, गायत्री-छन्द के नियमानुसार।

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