ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

वैदिक रक्षा मंत्र

ॐ ब्रह्मणस्पते त्वमस्य यन्ता सूक्तस्य बोधि तनयं च जिन्व । विश्वं तद्भद्रं यदवन्ति देवा बृहद्वदेम विदथे सुवीराः ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारप्रार्थना मंत्र
स्वरूपब्रह्मणस्पति
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे ब्रह्मणस्पति, आप इस ब्रह्मांड के नियंता हैं, हमारी स्तुतियों को समझें और हमारी संतति की वृद्धि करें। जिस कार्य की देवगण रक्षा करते हैं, वह कल्याणकारी होता है।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

उत्कृष्ट संतति की प्राप्ति और देवताओं का संरक्षण

विस्तृत लाभ

उत्कृष्ट संतति की प्राप्ति और देवताओं का संरक्षण।

जप काल

प्रातःकाल संधिकाल में या शांति कर्मों के दौरान।

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