त्रिगुण-अतीत योग मंत्र
त्वं गुणत्रयातीतः ॥ त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः ॥ त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम् ॥ त्वं शक्तित्रयात्मकः ॥ त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
आप तीनों गुणों, तीनों शरीरों और तीनों कालों से परे हैं। आप नित्य मूलाधार चक्र में स्थित हैं। आप तीन शक्तियों वाले हैं और योगी नित्य आपका ध्यान करते हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
कुंडलिनी जागरण, चक्रों का शुद्धिकरण और योग सिद्धि
विस्तृत लाभ
कुंडलिनी जागरण, चक्रों का शुद्धिकरण और योग सिद्धि।
जप काल
कुंडलिनी ध्यान और मूलाधार चक्र पर एकाग्रता के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
जो माता एकवीरा (रेणुका का एक नाम) के पुत्र हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: माता की असीम कृपा) 19।
ॐ पुण्याय नमः
ॐ विश्वामित्रायै नमः
ॐ दिव्यचक्षुषे नमः।
मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्। वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥
सीता राम हनुमंत राम सीता हनुमंत (Sita Rama Hanumantha Rama Sita Hanumantha)