ऋणहर्ता गणेश मंत्र
ॐ गणेश ऋणं छिन्धि वरेण्यं हुं नमः फट् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे गणेश, मेरे उत्कृष्ट ऋणों (आर्थिक और कर्मिक बाधाओं) को बलपूर्वक काट दें।
इस मंत्र से क्या होगा?
भारी कर्ज, दरिद्रता से मुक्ति और आर्थिक समृद्धि
विस्तृत लाभ
भारी कर्ज, दरिद्रता से मुक्ति और आर्थिक समृद्धि।
जप काल
मंगलवार, संकष्टी चतुर्थी पर ऋण मुक्ति के संकल्प के साथ।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
श्रीं वाग्देवतायै स्वाहा भालं मे सर्वदाऽवतु। (स्वरूप: वाग्देवता | लाभ: मस्तक, आज्ञा चक्र व विचार-केंद्र की रक्षा | अर्थ: श्रीं बीज रूपी वाग्देवता मेरे ललाट की सदा रक्षा करें) 8
सिंहासनगता नित्यं पद्माञ्चितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥
ॐ ह्रां सर्वशक्तिधाम्ने ईशानात्मने अङ्गुष्ठाभ्यां नमः
ॐ साधकप्राणायै नमः
ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥
भजे विशेषासुन्दरं समस्तपापखण्डनम्...