शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मंत्र
ॐ राक्षसामरगन्धर्वकोटिकोट्यभिवन्दिताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपत्रिलोक-पूज्य
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
राक्षसों, देवों और गंधर्वों द्वारा वंदित देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विविध पृष्ठभूमियों के लोगों का सहयोग
विस्तृत लाभ
विविध पृष्ठभूमियों के लोगों का सहयोग।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ मध्यं पातु हिरण्याक्ष-वक्षःकुक्षिविदारणः
ॐ आदिरूपायै नमः
ॐ सर्ववर्णात्मिकायै पादयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: सर्ववर्णात्मिका | लाभ: दोनों पैरों की रक्षा | अर्थ: समस्त अक्षर-स्वरूपा देवी मेरे पैरों की रक्षा करें) 8
ॐ करतारायै नमः
प्रतीच्यां उन्मत्त भैरवाय नमः प्रतीच्यां मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ भोजनाय नमः