ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

हनुमान मंत्र

ॐ अच्युतायै नमः

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारसहस्रनाम जप मंत्र;
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो अपने दिव्य स्वरूप से कभी च्युत (गिरती) नहीं होतीं।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

दृढ़ता और स्थिरता की प्राप्ति

विस्तृत लाभ

दृढ़ता और स्थिरता की प्राप्ति।

जप काल

तुलसी या कमलगट्टे की माला पर जप;

इसे भी पढ़ें

अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र

आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिङ्गलां पद्ममालिनीम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥

ॐ त्रिलोकेशाय नमः।

ॐ रणरङ्गजयाय नमः

ॐ हनुमान पहलवान पहलवान, बरस बारह का जबान, हाथ में लड्‍डू मुख में पान, खेल खेल गढ़ लंका के चौगान, अंजनी‍ का पूत, राम का दूत, छिन में कीलौ नौ खंड का भू‍त, जाग जाग हड़मान हुँकाला, ताती लोहा लंकाला, शीश जटा डग डेरू उमर गाजे, वज्र की कोठड़ी ब्रज का ताला, आगे अर्जुन पीछे भीम, चोर नार चंपे ने सींण, अजरा झरे भरया भरे, ई घट पिंड की रक्षा राजा रामचंद्र जी लक्ष्मण कुँवर हड़मान करें।

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥ वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयङ्करी॥

ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये महादेवः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः