शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ अधरं गोपिका पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपगोपिका
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
गोपिका मेरे अधर की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: निचले होंठ (अधर) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: निचले होंठ (अधर) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वागीश्वराय विद्महे हयग्रीवाय धीमहि तन्नो हयग्रीवः प्रचोदयात्।
ॐ विदुराक्रूरवरदाय नमः
ॐ सर्वतीर्थमयाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये महादेवतः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥
ॐ निरामयाय नमः