शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ अपरिच्छेद्याय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपअसीम
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिन्हें किसी सीमा, देश या काल में बांधा नहीं जा सकता।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
असीम सोच
विस्तृत लाभ
असीम सोच
जप काल
ध्यान
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ धन्यायै नमः
नमस्ते शारदे देवि काश्मीरपुरवासिनि। त्वामहं प्रार्थये नित्यं विद्यादानं च देहि मे॥
अशेषहावभावधीरहीरहारभूषिते प्रभूतशातकुम्भकुम्भकुम्भकुम्भसुस्तनि। प्रशस्तमन्दहास्यचूर्णपूर्णसौख्यसागरे कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो यतो यतो यामि ततो नृसिंहः। बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहो नृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये॥
ॐ विराजे नमः
ॐ कारणानन्दजापेष्टायै नमः