शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
सर्वांगीण रक्षा मंत्र
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकवच-मंत्र
स्वरूपरक्षक गणपति
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
आप मेरी रक्षा करें। वक्ता, श्रोता, दाता, धाता और गुरु-शिष्य की रक्षा करें। पश्चिम, पूर्व, उत्तर, दक्षिण, ऊपर और नीचे से रक्षा करें। मुझे सब ओर से सुरक्षित रखें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
दसों दिशाओं से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा
विस्तृत लाभ
दसों दिशाओं से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक सुरक्षा।
जप काल
यात्रा से पूर्व, या अज्ञात भय लगने पर मानसिक पाठ।
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