शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कुमार सूक्त मंत्र 2
अयं यः सृञ्जये पुरो दैववाते समिध्यते । द्युमाँ अमित्रदम्भनः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारवैदिक रक्षा मंत्र
स्वरूपअमित्रदम्भन (शत्रु-नाशक)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
देववात के पुत्र सृञ्जय के लिए प्रज्वलित यह अग्नि दीप्तिमान और शत्रुओं का नाश करने वाली है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विरोधियों का शमन, यश व कीर्ति की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
विरोधियों का शमन, यश व कीर्ति की प्राप्ति।
जप काल
वैदिक आहुति के साथ।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ वाङ्मे मनसि प्रतिष्ठिता मनो मे वाचि प्रतिष्ठितम् आविरावीर्म एधि॥
ॐ सत्यपराक्रमाय नमः
ॐ रक्षोविध्वंसकारकाय नमः
ॐ जामदग्न्यमहादर्पदलनाय नमः
ॐ भं भं भं भैरवी भद्रे भवान्यै ते नमो नमः।
ॐ नमो भगवते नरसिंहाय नमस्तेजस्तेजसे आविराविर्भव वज्रनख वज्रदंष्ट्र कर्माशयान् रन्धय रन्धय तमो ग्रस ग्रस ॐ स्वाहा। अभयमभयमात्मनि भूयिष्ठा ॐ क्ष्रौम्॥