शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
हनुमान मंत्र
ॐ षण्मुखाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपषण्मुख
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
छः मुखों वाले देव को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
छः दिशाओं से सुरक्षा व सर्वव्यापी दृष्टि
विस्तृत लाभ
छः दिशाओं से सुरक्षा व सर्वव्यापी दृष्टि।
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ॐ शुभाङ्गाय नमः
जो शांत भाव से सह्याद्रि (और महेंद्र) पर्वत पर निवास करते हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: जीवन में स्थिरता और भूमि-लाभ) 19।
ॐ त्रिस्वरायै नमः
ॐ त्वष्ट्रे नमः
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ धनदाय नमः।