कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 2
भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
करोड़ों सूर्यों के समान तेजस्वी, शिव स्वरूप नीलकंठ भैरव का मैं भजन करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
संसार-सागर से मुक्ति और ईप्सित (इच्छित) अर्थ की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
संसार-सागर से मुक्ति और ईप्सित (इच्छित) अर्थ की प्राप्ति।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ चक्रिणे नमः
ॐ शिशुपालशिरश्छेत्त्रे नमः
पिण्डजप्रवरारूढा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥
ॐ चित्रकूटसमाश्रयाय नमः
जामदग्न्यः परं यस्य दैवतं भृत्यवत्सलः। नित्यं परश्वधभृतः कवचस्यास्य धारणात्॥
ॐ गुरुजी को आदेश गुरुजी को प्रणाम, धरती माता धरती पिता, धरती धरे ना धीर बाजे श्रृंगी बाजे तुरतुरी आया गोरखनाथ मीन का पूत मुंज का छड़ा लोहे का कड़ा हमारी पीठ पीछे यती हनुमंत खड़ा, शब्द सांचा पिंड काचा फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।